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अब तो बस जहाँ देखुँ तेरा ही चेहरा रहता है

हर लम्हा मेरे आसपास तेरी यादोँ का पहरा रहता है
ये वक्त भी ना जाने अब कहाँ ठहरा रहता है
ना रात को करार है ना दिन को सकून है
अब तो बस जहाँ देखुँ तेरा ही चेहरा रहता है ।
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नहीं है जिंदगी  शिकायत तुझसे कुछ भी

नहीं है जिंदगी  शिकायत तुझसे कुछ भी
टुट चुका हुँ मै पर जिंदा हुँ मै अभी
साँसो को भी शिकायत रहती है मुझसे
खोया हुँ तेरे सवालों में सोया मै भी नहीं
साथ थे हम तो सताती थी दुनिया
अकेला हुँ मै मगर भुला अब भी नहीं
अरमाँ है देख लुँ जी भर के उसको
तकती है आँखे उसको आएगी शायद अभीWritten By:- सुब्रत आनंद
Date:- 23-07-2016

तो फिर कहाँ से पाओगे औरत की हर एक छवियाँ ?

माँ के अंदर बहन के अंदर बसी होती है लङकियाँ

गर समझो तो अमूल्य होती है लङकियाँ

घर को संजोने वाली भी होती है लङकियाँ

खुद से भी प्यारी होती है सबको अपनी बेटियाँ

घर सुना-सुना हो जाता है जब रुखसत होती है बेटियाँ

काँटे की चुभन सी बितती है एक पल और एक घङियाँ

हर किसी को प्यारी जब होती है इनकी छवियाँ

तो फिर दुनिया क्योंं कतराती है धरा पर लाने में लङकियाँ

गर युँ कतराओगे धरा पर लाने मे बेटियाँ

तो फिर कहाँ से पाओगे औरत की हर एक छवियाँ ?

आपकी मुस्कुराहट भी हमसे कुछ कहती है

आपकी मुस्कुराहट भी हमसे कुछ कहती है
खुबसुरती आपके रग-रग में दिखती है
वफा ए मुहब्बत की बेमिशाल मुरत हो आप
आप ना सही मगर आपकी नजरें ये बयाँ करती है ।

हमसफर अच्छा हो तो राह कैसी भी हो गुजर जाती है

हमसफर अच्छी हो तो राह कैसी भी हो
गुजर जाती है ।
मुहब्बत की राह में कोई मिलता है तो
कोई साथ छोङ जाती है ।
हर किसी को यहाँ नहीं मिलता मुहब्बत में
साथ देने वाला
मुहब्बत में कोई लुटता है और कोई किसी को
आबाद कर जाती है ।