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बाल हठ - बाल कविता ( सुब्रत आनंद )

बाल हठ सब साथी तैयार खड़े थे कुछ छोटे कुछ बहुत बड़े थे जाने थे हम सबको मेले मस्ती करते खाते केले कहते साथी चल जल्दी से माँगो पैसे माँ- दीदी से नहीं दे... और पढ़ें

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इस दुनिया को गुलाब कर दूँ क्या ?

हर जगह दंगे हर जगह लफ़ड़े... मैं भी बवाल कर दूँ क्या..?? लोग मारने- मिटाने पर लगे हैं इनके विरुद्ध इंकलाब कर दूँ क्या..? इंसान होकर जानवर सा व्यवहार आज... और पढ़ें

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भूमिपुत्र किसान हैं हम

धरा- धरती की शान हैं हम भूमि- पुत्र का नाम हैं हम सबकी भूख मिटाते हम फिर भी आधी खाते हम ये कैसी बदहाली छाई है क्यों ऐसी बेहाली आई है लाख आये विपदा मग... और पढ़ें

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अपने अभिलाषाओं में तुम, मत इनका बचपन झोंको

अपने अभिलाषाओं में तुम, मत इनका बचपन झोंको है करबद्ध निवेदन इतना, इस कुकृत्य को तुम रोको               🌹 १ 🌹 अभी तो वय हुई है इनकी, खेलने और खाने क... और पढ़ें

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प्यार के रंग सा दूजा कोई नहीं

रंग देखा बहुत इसको जाना बहुत प्यार के रंग सा दूजा कोई नहीं हो कर मायूस बैठा था मोड़ पर बिन प्यार दुनिया जैसे है हीं नहीं कर दो सराबोर प्यार के रंग से... और पढ़ें

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सुनो सब कुछ है स्वीकार मुझे

तुम समझ सके न मूल्य प्रेम का, तुझे दिखा दगा बस दगा प्रिये जब हृदय में ही प्रेम नहीं तो, सुनो सब कुछ है स्वीकार मुझे एकाकी भरे जीवन में जब, मिला तेरा... और पढ़ें

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आज मुझको नहीं है खबर ज़िंदगी

आज मुझको नहीं है ख़बर जिंदगी लग गयी है मुझे ज्यों नज़र जिंदगी हूँ परेशां बहुत क्या करूँ क्या नहीं? खत्म होने लगी है सफ़र जिंदगी अब सुहाता नहीं है मुझे य... और पढ़ें

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हूँ नहीं मैं बोझ पापा बेटियाँ कहती रही

कुछ हुआ तो था बुरा...सरगोशियाँ कहती रही हूँ नहीं मैं बोझ पापा...बेटियाँ कहती रही हम चढ़े जितने शिखर पर...छूट सब अपने गए क्यों नहीं पीछे मुड़े...तन्हाईय... और पढ़ें

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जिन्दगी - सुब्रत आनंद

तुम देख सकते हो, हमारे अंदर की तन्हाई जो बसी हुई है जन्म- जन्मांतर से  हमारे हृदय की  गहराइयों में, एक लंबी टीस सी खा रही हमें  भीतर ही भीतर उससे जल्... और पढ़ें

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गुरुदेव के चरणों में...

पहले गुरु माता- पिता, वंदन शीश झुकाय। बिन इनके संभव नहीं, जीवन सुख है पाय।। नमन उन्हें जो दे गए, जीवन का हर मर्म । चलूँ सदा मैं नेक पथ, करूँ नेक म... और पढ़ें

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कुछ दोहे...

सपने होते सच वही, दिखें जो खुली आँख पंछी उड़ते तब तलक, जब तक रहते पाँख...!! बचपन के वो दिन कहाँ, बस उसकी है याद वो गाँव की मस्तियाँ, मिली न उसके बा... और पढ़ें

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वेदना किससे कहें..?

नैनों में चुभने लगा, जैसे कोई तीर कैसे किसको हम कहें, अपने मन की पीर..!! जीवन के हर मोड़ पर, दोगे मेरा साथ फिर क्यों तूने थाम ली, अब दूजे का हाथ..? रो... और पढ़ें

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