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हम जख्म-ए-दिल ना दिखाते तो क्या करते

वफा-ए-मुहब्बत हम ना करते तो क्या करते
उसकी यादोँ मेँ छुप-छुप कर ना रोते तो क्या करते
उसने तो एक लफ्ज मेँ कह दिया भुल जा मुझे
हम जख्म-ए-दिल ना दिखाते तो क्या करते

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नहीं है जिंदगी  शिकायत तुझसे कुछ भी

नहीं है जिंदगी  शिकायत तुझसे कुछ भी
टुट चुका हुँ मै पर जिंदा हुँ मै अभी
साँसो को भी शिकायत रहती है मुझसे
खोया हुँ तेरे सवालों में सोया मै भी नहीं
साथ थे हम तो सताती थी दुनिया
अकेला हुँ मै मगर भुला अब भी नहीं
अरमाँ है देख लुँ जी भर के उसको
तकती है आँखे उसको आएगी शायद अभीWritten By:- सुब्रत आनंद
Date:- 23-07-2016