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दिल से कोई चाहे ऐसी चाहत कहाँ होती है

नफरत भरी दुनिया में मुहब्बत कहाँ होती है
दिल तो मिलते हैं मगर ईबादत कहाँ होती है
मिल कर बिछङ जाते हैं यहाँ पर दिल
दिल से कोई चाहे ऐसी चाहत कहाँ होती है

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नहीं है जिंदगी  शिकायत तुझसे कुछ भी

नहीं है जिंदगी  शिकायत तुझसे कुछ भी
टुट चुका हुँ मै पर जिंदा हुँ मै अभी
साँसो को भी शिकायत रहती है मुझसे
खोया हुँ तेरे सवालों में सोया मै भी नहीं
साथ थे हम तो सताती थी दुनिया
अकेला हुँ मै मगर भुला अब भी नहीं
अरमाँ है देख लुँ जी भर के उसको
तकती है आँखे उसको आएगी शायद अभीWritten By:- सुब्रत आनंद
Date:- 23-07-2016