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तु सामने बैठो तुझे एक गीत लिखुँगा

तुझे दिल तुझे धङकन तुझे जानम मैँ लिखुँगा
तुझे सावन तुझे बादल तुझे रिमझिम मैँ लिखुँगा
जो तेरे लब छु गए मेरे लबोँ से अब
तुझे अपनी मुहब्बत की तकदीर मैँ लिखुँगा
रहा जाता नहीँ अब बिन तेरे मेरी जाँ ये तु सुन ले
तु सामने बैठो तुझे एक गीत लिखुँगा

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नहीं है जिंदगी  शिकायत तुझसे कुछ भी

नहीं है जिंदगी  शिकायत तुझसे कुछ भी
टुट चुका हुँ मै पर जिंदा हुँ मै अभी
साँसो को भी शिकायत रहती है मुझसे
खोया हुँ तेरे सवालों में सोया मै भी नहीं
साथ थे हम तो सताती थी दुनिया
अकेला हुँ मै मगर भुला अब भी नहीं
अरमाँ है देख लुँ जी भर के उसको
तकती है आँखे उसको आएगी शायद अभीWritten By:- सुब्रत आनंद
Date:- 23-07-2016