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वफा मैनेँ की है वफा चाहता हुँ

वफा मैनेँ की है वफा चाहता हुँ
खुद से भी ज्यादा मैँ तुझे चाहता हुँ
ना दिन की फिकर ना रात का गम है
जो केवल तुझे देखे वो नजर चाहता हुँ
बैठे रहो तुम पास मेरे ना हो दुरियाँ
जुदा ना हो हम कभी ऐसा हमसफर चाहता हुँ

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नहीं है जिंदगी  शिकायत तुझसे कुछ भी

नहीं है जिंदगी  शिकायत तुझसे कुछ भी
टुट चुका हुँ मै पर जिंदा हुँ मै अभी
साँसो को भी शिकायत रहती है मुझसे
खोया हुँ तेरे सवालों में सोया मै भी नहीं
साथ थे हम तो सताती थी दुनिया
अकेला हुँ मै मगर भुला अब भी नहीं
अरमाँ है देख लुँ जी भर के उसको
तकती है आँखे उसको आएगी शायद अभीWritten By:- सुब्रत आनंद
Date:- 23-07-2016