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Showing posts from January, 2016

दिल से कोई चाहे ऐसी चाहत कहाँ होती है

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नफरत भरी दुनिया में मुहब्बत कहाँ होती है
दिल तो मिलते हैं मगर ईबादत कहाँ होती है
मिल कर बिछङ जाते हैं यहाँ पर दिल
दिल से कोई चाहे ऐसी चाहत कहाँ होती है

मेरे अंदर कुछ हलचल बस युँ ही चलती है

मेरे अंदर कुछ हलचल बस युँ ही चलती है
तेरे बिन मेरी जिँदगी बस माचिस सी जलती है
पास मेरे तुम हो तो परवाह नहीँ अब दुनिया की
मेरी साँसे भी शायद तेरे साँसोँ से चलती है

तु सामने बैठो तुझे एक गीत लिखुँगा

तुझे दिल तुझे धङकन तुझे जानम मैँ लिखुँगा
तुझे सावन तुझे बादल तुझे रिमझिम मैँ लिखुँगा
जो तेरे लब छु गए मेरे लबोँ से अब
तुझे अपनी मुहब्बत की तकदीर मैँ लिखुँगा
रहा जाता नहीँ अब बिन तेरे मेरी जाँ ये तु सुन ले
तु सामने बैठो तुझे एक गीत लिखुँगा

वफा मैनेँ की है वफा चाहता हुँ

वफा मैनेँ की है वफा चाहता हुँ
खुद से भी ज्यादा मैँ तुझे चाहता हुँ
ना दिन की फिकर ना रात का गम है
जो केवल तुझे देखे वो नजर चाहता हुँ
बैठे रहो तुम पास मेरे ना हो दुरियाँ
जुदा ना हो हम कभी ऐसा हमसफर चाहता हुँ