Thursday, 8 October 2015

वो नटखट जमाने मुझे आज भी याद हैं

वो बचपन की यादे

वो नटखट जमाने

वो कागज की कश्ती

मुझे आज भी याद है

वो परियों की रानी

मै परियोंं का राजा

वो सपनों मे उङना

मुझे आज भी याद है

वो माँ का आँचल

और माँ की लोरी

वो गा कर सुलाना

मुझे आज भी याद है

कभी राजा बनाना

कभी भुतों से डराना

वो नानी की कहानी

मुझे आज भी याद है

गलती गर हो जाए

वो पापा का डर

और माँ के गुस्से

से कहीं छुप जाना

मुझे आज भी याद है ।

अब रह गई है

बस वो पुरानी यादें

कुछ धुँधला सा पल

कुछ धुँधले से लम्हें

अब तो कुछ रहा नहीं

ना परियोंं का राजा

ना नानी की कहानी

ना माँ की लोरी

वो बिता जमाना

मुझे आज भी याद है

गर हो सके तो मुझको लौटा दे

वो कागज की कश्ती

वो बारिस का पानी

से खुद को भिंगोना

मुझे आज भी याद है

वो कागज की कश्ती

वो बारिश का पानी

वो मौसम सुहाना

मुझे आज भी याद है ।

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