Saturday, 10 October 2015

तेरी खुबसुरती का ये फसाना हुआ

तेरी खुबसुरती का ये फसाना हुआ
ये चाँद भी आज तुम्हारा दिवाना
हुआ
जुल्फोँ को तुम बिखराओ तो घटा बरसती है
हर किसी की जान अब तेरी जान मेँ बसती है
दुपट्टा गर लहराओ तो ही हवा भी चलती है
तेरी साँस को छुने को हर अरमाँ तङपती है
तुम हँसो तो बहारोँ के फुल भी तब खिलते हैँ
भँवर भी तब कहीँ जाकर कुमुदनी से मिलते हैँ
आँखो से कभी जो तुम मदिरा को पिलाती हो
ख्वाबोँ मेँ भी मेरे बस तुम ही याद आती हो
मदमस्त हो जाते हैँ तेरी आँखो मेँ पीनेवाले
शराबी को पैमाने की जरुरत भी तब कहाँ पङती है
तुझे ही देखकर तो गगन मेँ पक्षी भी चहकते हैँ
मेरे दिल मे तो अब केवल तेरी तस्वीर बसती है
मेरे दिल मेँ तो अब केवल तेरी तस्वीर बसती है

No comments:

Post a Comment

Featured post

अब तो बस जहाँ देखुँ तेरा ही चेहरा रहता है

हर लम्हा मेरे आसपास तेरी यादोँ का पहरा रहता है ये वक्त भी ना जाने अब कहाँ ठहरा रहता है ना रात को करार है ना दिन को सकून है अब तो बस जहाँ ...