तेरी खुबसुरती का ये फसाना हुआ

तेरी खुबसुरती का ये फसाना हुआ
ये चाँद भी आज तुम्हारा दिवाना
हुआ
जुल्फोँ को तुम बिखराओ तो घटा बरसती है
हर किसी की जान अब तेरी जान मेँ बसती है
दुपट्टा गर लहराओ तो ही हवा भी चलती है
तेरी साँस को छुने को हर अरमाँ तङपती है
तुम हँसो तो बहारोँ के फुल भी तब खिलते हैँ
भँवर भी तब कहीँ जाकर कुमुदनी से मिलते हैँ
आँखो से कभी जो तुम मदिरा को पिलाती हो
ख्वाबोँ मेँ भी मेरे बस तुम ही याद आती हो
मदमस्त हो जाते हैँ तेरी आँखो मेँ पीनेवाले
शराबी को पैमाने की जरुरत भी तब कहाँ पङती है
तुझे ही देखकर तो गगन मेँ पक्षी भी चहकते हैँ
मेरे दिल मे तो अब केवल तेरी तस्वीर बसती है
मेरे दिल मेँ तो अब केवल तेरी तस्वीर बसती है

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