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साँसो का क्या भरोसा ये तो टुट जाते है

साँसो का क्या भरोसा ये तो टुट जाते हैं

चंद लम्हो मे सारे रिश्ते-नाते छुट जाते हैं

जिसे आज तुम अपना-अपना कहते हो

शव पर आकर तेरे बस ये ही कुछ देर रो जाते हैं

शमशान पर पहुँच कर तेरे ये अपने

जलने मे कितना वक्त लगेगा ये सवाल पुछते हैं

कुछ नहीं जाता साथ तेरे ए मनुष्य

बस तेरे अच्छे कर्मो का फल ही तेरे काम आते हैं।

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नहीं है जिंदगी  शिकायत तुझसे कुछ भी

नहीं है जिंदगी  शिकायत तुझसे कुछ भी
टुट चुका हुँ मै पर जिंदा हुँ मै अभी
साँसो को भी शिकायत रहती है मुझसे
खोया हुँ तेरे सवालों में सोया मै भी नहीं
साथ थे हम तो सताती थी दुनिया
अकेला हुँ मै मगर भुला अब भी नहीं
अरमाँ है देख लुँ जी भर के उसको
तकती है आँखे उसको आएगी शायद अभीWritten By:- सुब्रत आनंद
Date:- 23-07-2016