Saturday, 3 October 2015

क्यों मैनें भी किसी बेवफा से दिल को लगाया

हम आशिकी मे यु मशगुल हो गए
तुझे चाहते रहे और हम दुर हो गए
क्या कमी थी मेरे प्यार मे ये तो बता दो
चलो कुछ ना तो मेरी खता बता दो
कौन सी गलती की मुझे ऐसी सजा मिली
मैने तो वफा की थी मुझे जफा मिली
अरमाँ थी मेरी तुझे सदा साथ देखने की
बिखरे जुल्फोंं मे तेरी घटा देखने की
कैसे मै तेरी बेवफाई को समझ ना पाया
क्यों मैने भी किसी बेवफा से दिल को लगाया
दर्द सिने मे युँ थर्राया ना होता
गर दुसरे के बाँहोंं मे तुझे पाया ना होता
चंद लम्हो मे तुमने सब कुछ भुला दिया
वो कसमे वो सपने सब कुछ दफा किया
मेरी तुमसे बस एक गुजारिश है
आँखे नम और दिल मे ख्वाईश है
मै तो सम्भाल लुँगा जो तुमने मुझे दिया
ऐसे जख्म किसी को फिर तुम ना देना
ये दिल है कोई खिलौना मत समझना
दुआ मेरी है खुदा से तु जहाँ रहे वहाँ खुश रहे
मै बर्बाद सही मगर तु आबाद रहे

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