Saturday, 10 October 2015

तेरी खुबसुरती का ये फसाना हुआ

तेरी खुबसुरती का ये फसाना हुआ
ये चाँद भी आज तुम्हारा दिवाना
हुआ
जुल्फोँ को तुम बिखराओ तो घटा बरसती है
हर किसी की जान अब तेरी जान मेँ बसती है
दुपट्टा गर लहराओ तो ही हवा भी चलती है
तेरी साँस को छुने को हर अरमाँ तङपती है
तुम हँसो तो बहारोँ के फुल भी तब खिलते हैँ
भँवर भी तब कहीँ जाकर कुमुदनी से मिलते हैँ
आँखो से कभी जो तुम मदिरा को पिलाती हो
ख्वाबोँ मेँ भी मेरे बस तुम ही याद आती हो
मदमस्त हो जाते हैँ तेरी आँखो मेँ पीनेवाले
शराबी को पैमाने की जरुरत भी तब कहाँ पङती है
तुझे ही देखकर तो गगन मेँ पक्षी भी चहकते हैँ
मेरे दिल मे तो अब केवल तेरी तस्वीर बसती है
मेरे दिल मेँ तो अब केवल तेरी तस्वीर बसती है

बेबसी ने मुझे इस कदर सताया है

बेबसी ने मुझे इस कदर सताया है

खुद की लाचारी पर अब मुझे रोना आया है

जिन्दगी तुझसे मै एक सवाल पुछता हुँ

तुने दिया किया है मुझे केवल खोया हुँ

किरदार भी दिया तुमने तो ये कैसा दिया

खुद को ही तुमने खुद से जुदा
किया

ना खुशी दी ना खुशनुमा संसार दिया

ना दिल दी ना मुहब्बत और प्यार दिया

दिया केवल जमाने मे तुमने खुदगर्जी की सौगात

अपने ही आज अपनोंं पर लगाए बैठे हैं घात

खुन के रिश्ते अब खुनोंं की होली खेलते हैं

सगे संबंधी भी केवल तंज की बोली बोलते हैं

कुछ नहींं रह गया है अब इस दुनिया मे  ए जिंदगी

जिंदा हुँ तो इसलिए की केवल कुछ साँस बाकी है
जो अब तलक चलती है

मंजिल वही रहती है बस सफर बदल जाते हैं

मंजिल वही रहती है बस सफर बदल जाते हैं

मुहब्बत भरी दुनिया मे हमसफर बदल जाते हैं

आरजू होती है तुझमे खो जाने की

बेवफा तुम ना हो जाओ कहींं.ये सोच ख्यालात बदल जाते है

तमन्ना होती है तुम्हें हमसफर बना लुँ

तमन्ना होती है तुम्हे हमसफर बना लुँ

दुनिया की नजरो से तुझ को बचा लुँ

कर के एलान हाँ मुहब्बत है तुमसे

सारी दुनिया से कहकर खुद मे छुपा लुँ

भुल कर दुनिया की रश्म-ओ-रिवाज

तेरी झील से आँखो मे खो जाउँ आज

तेरी सादगी मे कुछ ऐसा कर जाऊँ

तुम मेरी गजल बनो मै तेरा शायर बन जाऊँ

तुम मेरी गजल बनो मै तेरा शायर बन जाउँ

साँसो का क्या भरोसा ये तो टुट जाते है

साँसो का क्या भरोसा ये तो टुट जाते हैं

चंद लम्हो मे सारे रिश्ते-नाते छुट जाते हैं

जिसे आज तुम अपना-अपना कहते हो

शव पर आकर तेरे बस ये ही कुछ देर रो जाते हैं

शमशान पर पहुँच कर तेरे ये अपने

जलने मे कितना वक्त लगेगा ये सवाल पुछते हैं

कुछ नहीं जाता साथ तेरे ए मनुष्य

बस तेरे अच्छे कर्मो का फल ही तेरे काम आते हैं।

चाहत मे तेरी मै जिंदगी सँवार दुँ

चाहत मे तेरी मै जिंदगी सँवार दुँ
जितना किसी ने ना दिया वो मै प्यार दुँ
खुदा के बेमिशाल कारीगरी का तोहफा हो तुम
फिर क्युँ ना तेरी जिंदगी मे सारी दुनिया वार दुँ

मेरे लफ्जों में तेरे सिवा कोई नाम ना हो

मेरे लफ्जो में तेरे सिवा कोई नाम ना हो

तेरे बिना मेरी पुरी कोई शाम ना हो

साँस भी चले तो बस तेरे पास होने पे चले

हमारी जिंदगी मे गम का कोई नामो निशान ना हो

कितनी मुहब्बत तुमसे है ये मै नही जानता

कितनी मुहब्बत तुमसे है ये मै नही जानता
दुवाओ मे कैसे ना मै तुझे माँगता
तमन्ना है मेरी हर वक्त तेरे साथ रहने की
फिर कैसे ना मै तुझे खुदा मानता

Thursday, 8 October 2015

वो नटखट जमाने मुझे आज भी याद हैं

वो बचपन की यादे

वो नटखट जमाने

वो कागज की कश्ती

मुझे आज भी याद है

वो परियों की रानी

मै परियोंं का राजा

वो सपनों मे उङना

मुझे आज भी याद है

वो माँ का आँचल

और माँ की लोरी

वो गा कर सुलाना

मुझे आज भी याद है

कभी राजा बनाना

कभी भुतों से डराना

वो नानी की कहानी

मुझे आज भी याद है

गलती गर हो जाए

वो पापा का डर

और माँ के गुस्से

से कहीं छुप जाना

मुझे आज भी याद है ।

अब रह गई है

बस वो पुरानी यादें

कुछ धुँधला सा पल

कुछ धुँधले से लम्हें

अब तो कुछ रहा नहीं

ना परियोंं का राजा

ना नानी की कहानी

ना माँ की लोरी

वो बिता जमाना

मुझे आज भी याद है

गर हो सके तो मुझको लौटा दे

वो कागज की कश्ती

वो बारिस का पानी

से खुद को भिंगोना

मुझे आज भी याद है

वो कागज की कश्ती

वो बारिश का पानी

वो मौसम सुहाना

मुझे आज भी याद है ।

Sunday, 4 October 2015

वरना आन पर जिस दिन आ पङे नामो निशान मिटाने वाले हैं

ना खङग ना तलवार ना किसी भी भाल से

भारत माँ का बेटा हुँ नही डरते किसी भी वार से

भारत माँ की ओर गर कोई अंगुली भी उठाएगा

धर नरसिंहा रुप मै दौङा चला आँऊगा

शहिदो के खुन से रंगी मिट्टी हिन्दुस्तान की

जान की मुझको खबर नहीं परवाह है भारत माँ की

माँ की रक्षा खातिर हमने पहना कफन का चोला है

दुश्मन की गोली की परवाह नहीं हम फौलादी शोला हैं

कोई बाँट नहींं सकता हमे जाति और मजहबो मे

हिन्दु-मुस्लिम अलग नही हम सभी है एक मे

कोई जाति कोई मजहब अलग नही है देश मे

सभी साथ है फर्क यही है अलग-अलग है भेष मे

बुरी नजर भी तिरंगा पर अगर कोई डालेगा

माँ के वीर सपुतों का फिर हाथ खाली नही रह जाएगा

हर सपुतो के हाथ मे  होगी खुन से रंगी तलवार की

शहिदो के खुन से रंगी मिट्टी हिन्दुस्तान की

साथ चलोगे साथ बढोगे तो हम साथ निभाने वाले हैं

वरना आन पर जिस दिन आ पङे नामो निशान मिटाने
वाले हैं

नाम नहींं रह जाएगा फिर दुनिया के मानचित्र पर

इतिहास बन कर रह जाओगे फिर देखेंगे तुझे चलचित्र पर

अभी वक्त है अभी सम्भल जा हम गिले-शिकवे भुलाने वाले हैं

वरना आन पर जिस दिन आ पङे नामोँ निशान मिटाने
वाले हैंं

प्रेषक...... सुब्रत आनंद

Saturday, 3 October 2015

क्यों मैनें भी किसी बेवफा से दिल को लगाया

हम आशिकी मे यु मशगुल हो गए
तुझे चाहते रहे और हम दुर हो गए
क्या कमी थी मेरे प्यार मे ये तो बता दो
चलो कुछ ना तो मेरी खता बता दो
कौन सी गलती की मुझे ऐसी सजा मिली
मैने तो वफा की थी मुझे जफा मिली
अरमाँ थी मेरी तुझे सदा साथ देखने की
बिखरे जुल्फोंं मे तेरी घटा देखने की
कैसे मै तेरी बेवफाई को समझ ना पाया
क्यों मैने भी किसी बेवफा से दिल को लगाया
दर्द सिने मे युँ थर्राया ना होता
गर दुसरे के बाँहोंं मे तुझे पाया ना होता
चंद लम्हो मे तुमने सब कुछ भुला दिया
वो कसमे वो सपने सब कुछ दफा किया
मेरी तुमसे बस एक गुजारिश है
आँखे नम और दिल मे ख्वाईश है
मै तो सम्भाल लुँगा जो तुमने मुझे दिया
ऐसे जख्म किसी को फिर तुम ना देना
ये दिल है कोई खिलौना मत समझना
दुआ मेरी है खुदा से तु जहाँ रहे वहाँ खुश रहे
मै बर्बाद सही मगर तु आबाद रहे

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