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दिल कल भी तुम्हारा था दिल अब भी तुम्हारा है


जब से दिखाए हैं तुने चाहत के दिन,

तेरे बिना नही एक पल गँवारा है।

सुन सको तो सुनना मेरे धङकन की तलब,

दिल कल भी तुम्हारा था दिल अब भी तुम्हारा है ।

क्योंं सोचते हो तुम अब मुझे तुमसे प्यार नहीं

भला वो भी कभी दुर हो सकता है जो रग-रग मे समाया है ।

भुल नही पाया एक पल भी तुमको,

मेरे हर ओर तेरा ही साया है ।

हो सके तो लौट आना तुम मेरी जिन्दगी मे

तेरे लिए मैने एक-एक पल सँवारा है ।

ये कुदरत भी कैसे-कैसे खेल दिखाती है हमे

एक बार तो गलती कर दी अब ना कहुँगा ये वक्त हमारा है ।।

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नहीं है जिंदगी  शिकायत तुझसे कुछ भी
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अरमाँ है देख लुँ जी भर के उसको
तकती है आँखे उसको आएगी शायद अभीWritten By:- सुब्रत आनंद
Date:- 23-07-2016